MSME सेक्टर को सरकार और बड़ी प्राइवेट फर्म ने नहीं किया 6 लाख करोड़ रु. का भुगतान, नितिन गडकरी ने कहा- तीन माह में ढूंढ़ निकालेंगे हल
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम (MSME) मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को सरकारी और बड़ी निजी कंपनियों की ओर से सूक्ष्म और लघु उद्यमों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपए का भुगतान न करने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्र इस गंभीर समस्या का समाधान खोजने के लिए काम कर रहा है। गडकरी ने उम्मीद जताई कि अगले तीन माह में इस समस्या का हल निकाल लिया जाएगा। इस दौरान उन्होने एमएसएमई सेक्टर के लिए नई परिभाषा तय करने की भी बात कही गई और सहकारी क्षेत्र एवं गैर-सरकारी बैंकिंग कंपनियों से इस क्षेत्र की इकाइयों को लोन सुविधा प्रदान करने के लिए कहा गया है। एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2024 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 हजार अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है तथा इस लक्ष्य को हासिल करने में एमएसएमई का महत्वपूर्ण योगदान होगा। विपक्ष की ओर से एमएसएमई सेक्टर के बजट में कटौती के आरोपों को गडकरी ने सिरे से खारिज कर दिया।
22 हजार लोगों को बैंकों से लोन मिला
उन्होंने कहा कि बैंकों को एमएसएमई क्षेत्र को लोन देने के मामले में न्यूनतम कर्ज का लक्ष्य तय करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार के ताजा प्रयासों के बाद अभी तक 22 हजार लोगों को बैंकों से लोन दिया गया है। गडकरी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ऋण मिल सके, इसके लिए अब सहकारी क्षेत्र के बैंकों एवं नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) को भी इस क्षेत्र को लोन देने की मंजूरी दे दी गयी है. उन्होंने स्वीकार किया कि वैश्विक कारणों, पूंजी की कमी, जीएसटी (GST) एवं नोटबंदी के चलते इस क्षेत्र के लिए कुछ समय परेशानियां खड़ी हो गयी थीं जैसा कोई भी नयी व्यवस्था के आने के बाद स्वाभाविक रूप से होता है। गडकरी ने बताया कि खादी उद्योग क्षेत्र में सरकार ब्रांडिंग पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि इस क्षेत्र में मार्केटिंग के लिए निजी एजेंसियों की मदद ली जाए और इसमें ‘कार्पोरेट कल्चर’ लाया जाए।