कोरोना से निपटने के लिए ट्रम्प ने 74 लाख करोड़ रु. के राहत पैकेज घोषणा की, 18.5 लाख करोड़ रु. सीधे अमेरिकियों के खाते में जाएगा

कोरोनावायरस ने अबतक 167 देशों को अपनी जद में ले लिया है। अमेरिका के सभी 50 राज्य इसकी चपेट में है। अकेले अमेरिका में इससे अबतक 105 मौतें हो चुकी है। इससे महामारी से निपटने और लोगों को राहत देने के लिए ट्रम्प सरकार में राहत पैकेज की मांग की है। इस राहत पैकेज की राशि करीब 62.90 लाख करोड़ से 74 लाख करोड़ रुपए के बीच होगी। मंगलवार को ही अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्टीवन न्यूचन ने बयान दिया था कि अगर राहात पैकेज जारी नहीं किया गया तो बेरोजगारी की दर 20 फीसदी तक बढ़ जाएगी।


आधिकारिक आंकडों के अनुसार इस पैकेज में किसे क्या मिलेगा- 



  • 37 लाख करोड़ रुपए से 40 लाख करोड़ रुपए डायरेक्ट पेमेंट और टैक्स कटिंग के रूप में

  • 14.8 लाख करोड़ रुपए से 22.2 लाख करोड़ रुपए स्मॉल बिजनेस असिस्टेंट के रूप में

  • और 3.7 लाख करोड़ रुपए से 7.4 लाख करोड़ रुपए एयरलाइन और अन्य इंडस्ट्रीज को दिया जाएगा


व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर बताया कि, 18.5 लाख करोड़ रुपए सीधे अमेरिकियों की जेब में जाएगा। वहीं, न्यूचन ने भी मंगलवार को यह बताया कि प्रशासन जल्द ही इस फंड को लोगों तक पहुंचाना चाहता है। न्यूचन ने व्हाइट हाउस में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका के लोगों को तत्काल कैश की जरूरत है और आने वाले दो हफ्ते में इसे लोगों तक पहुंचा दिया जाएगा। फंड मिलने वाले लोगों में यहां रहने वाले अरबपति भी शामिल हैं।


व्हाइट हाउस जल्द ही इसे लेकर कांग्रेस से चर्चा करेगा साथ ही इस बात का भी ख्याल रखा जाएगा इसमें इंडस्ट्रीज के साथ-साथ आम लोग और वर्करों का भी ख्याल रखा जाए। प्रशासन ने एयरलाइन इंडस्ट्री को लेकर भी स्पष्ट रणनीति तैयार की है। ट्रम्प और न्यूचन ने कोरोना के कारण ठप हुई क्रूज और होटल इंडस्ट्रीज का भी ख्याल रखा है।


ट्रम्प ने एक प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि हम नहीं चाहते कि हमारी एयरलाइन इंडस्ट्री का काम ठप हो और इस कारण लोगों में बेरोजगार हो जाए, इसलिए हम लोगों के लिए बड़ा, बेहतर और ठोस कदम उठाना चाहते हैं।


हालांकि एक न्यू मैक्सिको डेमोक्रेट सेन टॉम उडाल ने स्पष्ट कर दिया है कि इंडस्ट्रीज को कोई भी सहायता खासतौर से वर्करों को मिलने वाली महत्वपूर्ण सहायता के साथ मिलनी चाहिए। कांग्रेस में पहले से ही एक दूसरे कोरोनावायरस राहत बिल में भुगतान करने के बारे में विवाद चल रहा है, जिसे सीनेट से पारित करना बाकी है। उन्होंने आगे बताया कि- किसी भी आर्थिक राहत को कर्मचारियों और उनके परिवारों को होने वाले लाभ पर निर्भर होना चाहिए, न कि सीईओ और शेयरधारकों को”